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विदेश में पढ़ाई का बदला ट्रेंड, अब डिग्री से ज्यादा नौकरी के लिए जा रहे युवा

द्वारा The News Chapter Adminप्रकाशित 9 सित॰ 2026

विदेश में पढ़ाई को लेकर भारतीय छात्रों की प्राथमिकताएं अब बदलती नजर आ रही हैं। छात्र केवल प्रतिष्ठित विदेशी संस्थानों में दाखिला लेने पर ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि पढ़ाई के बाद मिलने वाले रोजगार, करियर ग्रोथ और लंबे समय के फायदे को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 49 प्रतिशत भारतीय छात्रों ने विदेश में पढ़ाई करने की प्रमुख वजह बेहतर नौकरी के अवसरों को बताया है।

विदेश में पढ़ाई को लेकर भारतीय छात्रों की प्राथमिकताएं अब बदलती नजर आ रही हैं। छात्र केवल प्रतिष्ठित विदेशी संस्थानों में दाखिला लेने पर ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि पढ़ाई के बाद मिलने वाले रोजगार, करियर ग्रोथ और लंबे समय के फायदे को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 49 प्रतिशत भारतीय छात्रों ने विदेश में पढ़ाई करने की प्रमुख वजह बेहतर नौकरी के अवसरों को बताया है।

नौकरी के बेहतर अवसर सबसे बड़ी वजह

कौशल विकास और कार्यबल विकास कंपनी अपग्रेड की अंतरराष्ट्रीय शिक्षा रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर रोजगार के अलावा शिक्षा की गुणवत्ता, स्थायी रूप से विदेश में बसने की इच्छा और जीवनशैली भी छात्रों के विदेश जाने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय छात्र अब सिर्फ किसी प्रतिष्ठित संस्थान के नाम के आधार पर विदेश में पढ़ाई का फैसला नहीं ले रहे हैं। वे पढ़ाई की लागत के मुकाबले मिलने वाले लाभ, रोजगार की संभावनाओं और भविष्य के करियर अवसरों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

53,800 छात्रों की जानकारी पर आधारित रिपोर्ट

यह रिपोर्ट जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच सलाह लेने वाले 53,800 छात्रों से मिली जानकारी पर आधारित है। इनमें 65.8 प्रतिशत नए स्नातक थे, जबकि करीब 60 प्रतिशत छात्र मझोले और छोटे शहरों से आए थे। रिपोर्ट में शामिल ज्यादातर छात्र अपने करियर की शुरुआत में थे और हाल ही में स्नातक की डिग्री हासिल कर चुके थे।

यूरोप की ओर बढ़ रहा छात्रों का रुझान

अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे पारंपरिक शिक्षा केंद्रों की अहमियत अभी भी बनी हुई है, लेकिन यूरोपीय देशों के प्रति छात्रों की रुचि बढ़ रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कड़े इमिग्रेशन नियमों और बढ़ती लागत के बीच छात्र जर्मनी, फिनलैंड, स्पेन और फ्रांस जैसे देशों का रुख कर रहे हैं। कम खर्च, उद्योग की जरूरतों से जुड़ी पढ़ाई और रोजगार के बेहतर अवसर इन देशों को छात्रों के लिए आकर्षक बना रहे हैं।

30 लाख रुपये से कम बजट पर फोकस

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि छात्र विदेश में पढ़ाई के लिए कम खर्च और ज्यादा लाभ वाले विकल्पों पर ध्यान दे रहे हैं। करीब 10 में से 7 विद्यार्थी 30 लाख रुपये से कम के कुल बजट में विदेश में पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं।

अपग्रेड स्टडी अब्रॉड के विश्वविद्यालय साझेदारी मामलों के उपाध्यक्ष प्रनीत सिंह के अनुसार, विदेश में पढ़ाई के क्षेत्र में बड़ा बदलाव हो रहा है। भारतीय छात्र अब भविष्य में रोजगार मिलने की संभावना, करियर में आगे बढ़ने के अवसर और कम खर्च को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। उनके मुताबिक, यूरोप की बढ़ती लोकप्रियता छात्रों की इसी बदलती सोच को दर्शाती है।

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