राजनीति

अशोक सिद्धार्थ राजनीति से सन्यास लें.., आकाश आनंद की वापसी पर मायावती की बड़ी शर्त

द्वारा The News Chapter Adminप्रकाशित 9 सित॰ 2026

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद की पार्टी में वापसी को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। इसे आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य को लेकर मायावती का तीसरा यू-टर्न माना जा रहा है।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद की पार्टी में वापसी को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। इसे आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य को लेकर मायावती का तीसरा यू-टर्न माना जा रहा है। मायावती ने साफ किया है कि आकाश आनंद को पार्टी में कोई अहम जिम्मेदारी तभी मिलेगी, जब उनके ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लेंगे।

मायावती ने X पर रखी अपनी बात

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि अशोक सिद्धार्थ द्वारा यह शर्त पूरी करने के बाद ही आकाश आनंद पार्टी में बिना किसी दबाव के स्वतंत्र रूप से काम कर सकेंगे। इसके बाद ही पार्टी सहानुभूतिपूर्वक उनकी पुरानी जिम्मेदारियों को बहाल करने पर विचार करेगी।

https://x.com/Mayawati/status/2097615009685839986?s=20

आकाश आनंद की जिम्मेदारियों में होता रहा बदलाव

मायावती के भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश आनंद को कभी बसपा सुप्रीमो का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जा रहा था। हालांकि, साल 2024 के बाद से उनकी पार्टी में जिम्मेदारियों को लेकर लगातार बदलाव देखने को मिले। उन्हें कई मौकों पर पदोन्नत किया गया और फिर पद से हटाया भी गया।

यही स्थिति उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ के साथ भी रही है। सिद्धार्थ को साल 2025 में बसपा से पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था, जिसके बाद उनकी वापसी संभव हो सकी थी। अब एक बार फिर दोनों पर पार्टी नेतृत्व का फैसला सामने आया है।

मायावती ने पहले भी दी थी नसीहत

मायावती ने अतीत का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी आकाश आनंद को अपने ससुर के प्रभाव से दूर रहने की नसीहत दी थी। सिद्धार्थ को पार्टी से अगस्त में निष्कासित भी किया गया था।

मायावती का आरोप है कि अशोक सिद्धार्थ ने बहुजन मिशन से ऊपर अपने निजी और पारिवारिक हितों को रखा। इसके चलते उन्हें और उनके दामाद आकाश आनंद दोनों को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने सिद्धार्थ को सुधरने के कई मौके दिए, लेकिन उन्होंने मिशन की परवाह नहीं की।

मायावती ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ के पास अब भी मौका है कि वे अपने दामाद के भविष्य और पार्टी के हित में अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को त्याग दें।

दलित-बहुजन आंदोलन के लिए अहम चुनाव

मायावती ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले आगामी चुनावों का जिक्र करते हुए इन्हें दलित-बहुजन आंदोलन के लिए बेहद अहम बताया।

उन्होंने चेताया कि आरक्षण और आंदोलन के सामने कई चुनौतियां हैं। ऐसे में समाज का कोई भी व्यक्ति निजी स्वार्थ में ऐसा कदम न उठाए, जिससे आंदोलन को नुकसान पहुंचे।

अब सबकी नजरें अशोक सिद्धार्थ के फैसले पर टिकी हैं।

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